Friday, October 15, 2010

भुनगा पंडित

निर्देश- कहानी में प्रत्येक पूर्ण-विराम आने पर ‘हूँ’ शब्द का उच्चारण कर ‘हुंकारी’ भरते रहें वरना कहानी बंद हो जायेगी | फिर ना कहना कि बताया नहीं था |

कथा प्रारम्भ-

बहुत दिनों पहले की बात है इक गाँव में इक पंडित जी रहते थे | अध्ययन करने का मौका कम ही निकाल पाते थे तो उन्होंने कुछ ‘जुगाड’ बनाए | उस समय लोग अपनी छोटी-छोटी समस्याएं ‘पंडीजी’ लोगों से ही हल करवाते थे | अधिकतम लोगों को ‘आज तिथि कौन सी है ?’ जैसे चीजों को जानने की फिक्र रहती थी क्योंकि वे विद्यारंभ से लेकर खेत की बुवाई और कन्या के लिए वर देखने से लेकर शव का अंतिम संस्कार करने तक का काम तिथि के अनुसार करते थे |
हमारे पंडीजी ने तिथि देखने का एक प्रेक्टिकल तरीका निकाला | उन्होंने अपने घर में कोनों पर गिनकर तिथियों के हिसाब से लाठियां रख दी | जब भी कोई तिथि पूछने आता पंडीजी अंदर जाते लाठी देखते और लौट कर तिथि बता देते | कभी गलती नहीं होती थी | इसी प्रकार दिन सुख से गुजर रहे थे |

एक दिन सुबह पंडीजी बड़े तडके (सुबह) उठ कर मैदान (शौच) गए तो उन्होंने देखा की धोबी का गधा उनके खेत में चर रहा था | गधा हांककर उन्होंने बुद्धू के खेतों में कर दिया और फारिग हो के घर लौट आए | थोड़ी देर बाद ही धोबी आ पहुँच | बेचारा परेशान था उसने कहा- ‘पंडीजी मेरा गधा तीन दिन से लापता है | मैं तो खोज के थक गया अब आप ही कोई उपाय करिये |’ पंडीजी के दिमाग में कीड़ा कुलबुलाया | थोड़ी देर चुपचाप बैठे रहे, घर के अंदर गए और लौट के बोले ‘मेरी गणना के हिसाब से तुम्हारा गधा इस समय बुद्धू के खेत में होना चाहिए|’ धोबी भाग के बुद्धू के खेत पर पहुंचा तो देखा गधा कान हिला-हिल के मस्त चर रहा है |’ धोबी खुश गधा लेके घर आया और पंडीजी की बड़ी जयजयकार की |
एक दिन पंडीजी ओसारे में बैठे रस्सी बट रहे थे अंदर पंडिताइन और पड़ोसन कुछ बात कर रही थीं | पड़ोसन ने कहा ‘पंडिताइन, ई भिखुआ के मेहरारू बड़ी ठसक वाली है | सबेरे से दस तोला गहना लाद के दाल दर रही है | हमका तो देखि के हंसी आय गई |’
दूसरे दिन परेशान सा भीखू पंडीजी के पास आ के रोने लगा- ‘पंडीजी, गजब होई गया ! मेहरिया के सोने की टिकुली गुम हो गई | घर में कारन मचा रखा है | आप तो ज्ञानी हो कुछ मदद करो | पंडीजी फिर थोड़ी देर विचार किये, घर के अंदर गए और बाहर आ के बोले- ‘जा भिखुआ, दाल वाली देग उलट दे उसी में मिल जायेगी |’ पंडीजी कि सहज बुद्धि काम कर गई | टिकुली मिल गई | भीखू और उसकी पत्नी ने तो पंडीजी के गुन पूरे गाँव में गाने शुरू कर दिया | हो गए हमारे पंडीजी मशहूर | प्रसिद्धि नगर तक फैलने लगी |

एक दिन राजा अपनी आरामगाह में बैठे थे | पता नहीं कहाँ से एक भुनगा उड़ता चला आया | राजा ने झपट के उसे मुटठी में कैद कर लिया | तभी उनके दिमाग में भी कीड़ा कुलबुलाया ‘क्यों ना इससे अपने ज्ञानियों की परीक्षा ले ली जाय’| भुनगा मुटठी में दबाये पहुँच दरबार में और सभा में कहा – ‘जो बताये कि मेरी मुटठी में क्या है उसे ज्ञानी मानू |’ सभी ने दिमाग लगाना शुरू किया कि राजा के हाथ में क्या हों सकता है | किसी ने हीरा बताया, किसी ने मोती, किसी ने पन्ना बताया तो किसी ने पुखराज | सबकी बात गलत | राजा ने कहा ‘जो कोई भी बताए उसे तमाम इनामो-इकराम नवाज़ा जायेगा | बहुतेरे आये और मुँह की खाई | अब तो दिल्लगी गुस्से में बदल गई | राजा के क्रोध से बचने के लिए वहाँ किसी ने कहा- ‘महाराज पास के गाँव में एक पंडित जी हैं | बड़े ज्ञानी है | सुना है गुमशुदा चीजों को चुटकी में बता देते हैं | उनके पास जवाब जरूर होगा |’ राजा ने कहा ‘बुलाओ पंडित को और ना बता पाया तो सौ कोड़े लगवाये जायेंगे |
सिपाही राजा का परवाना लेके पंडीजी के घर पहुँच गए | पंडीजी दरबार आये और मसला पता चला तो उनके तो काटो तो खून नहीं ‘हाय! विधिना अब कोड़े भी खाने पड़ेंगे | बेज्जती होगी सो अलग |’ काफी देर सिर खुजाते रहे कुछ नहीं सूझा तो सोचा सच्चाई बयाँ कर दें शायद राजा कोड़े ना लगवाए | अब उन्होंने कहा राजन ध्यान से सुनियेगा गूढ़ बात बताए देता हूँ-
“लाठी देखा कोन-कोनैय्या, गदहा देखा खेत चरईया,
आई पड़ोसन कह गई बात, भुनगा फँसि गए राजा क हाथ |”

राजा ने फ़ौरन मुटठी खोल दी | भुनगा उड़ निकला | राजा ने तमाम इनाम-इकराम पंडीजी को दे कर विदा किया | पंडीजी भी जान बची तो लाखों पाए | खुशी-खुशी घर पहुँच पंडिताइन को माल असबाब थमाया | और गिर गए माँ के पैरों में ‘माँ आज मैं जान गया कि माँ-बाप के मुह से ब्रह्म वचन निकलता है | मुझे अक्सर खीज होती थी कि मेरा नाम भुनगा क्यों रखा कुछ अच्छा भी तो रख सकते थे | आज तुम्हारे दिए इस नाम ने दौलत भी दी और इज्ज़त भी |’ माँ ने भुनगा को उठा के गले लगा लिया |

1 comment:

  1. chatak jee .. bahut khoob ...kehte hain jo kuchh bhi hota hai wo achchhe ke liye hota.. is kahani ye baat fir sidh ho gyi hai.
    huuu..
    :)

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