आज चाहत फिर मेरी माँ की जिद से टकराई,
और मेरा प्यार बना मेरी माँ की रुसवाई,
माँ ने फिर मांग ली मुझसे अहसासों की बलि,
आँख में ‘कृष्ण’ के फिर से घटायें घिर आई |
माँ जो खुश हुई तो पूछा- मांगता क्या है ?
‘माँ, मैं फिर से जनम लूँ , तेरा बेटा बनकर |’
No comments:
Post a Comment