अभी तो थी, अभी तो है !
किसे खबर है, कौन जानता है, किसको पता है ?
हमें तलाश है किस शै की, कौन रूह्पोश है ?
जिगर को कुछ नहीं पता, नज़र को अजनबी सी है,
मगर वो पास है मेरे, अभी तो थी, अभी तो है !
अजब सवाल है हम उनके खयालों की तिश्नगी,
कहाँ छुपाएँ कि नज़रें सवाल कर न सकें,
जिन्हें पहचानते नहीं उन्ही के साये छिपाए,
पलक की जुम्बिशों तले, अभी तो थी, अभी तो है !
करार पाने की हसरत करे कैसे ‘चातक’ ?
अभी लागी है लगन, कुछ तो और जलने दो,
हवाओं पर बनेगी रश्क करेगा जहाँ जिस पर,
कि वो ताबीर-ए-तसव्वुर, अभी तो थी, अभी तो है !
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