Friday, October 15, 2010

मेरा ईश्वर – तेरा ईश्वर

तेरे ही अंतर्मन का डर बन बैठा है तेरा ईश्वर,
वह कौन जिसे तू तकता है ? वह कौन जिसे तू पूज रहा ?
न प्रतिमा है न ज्योति है, तेरी पूजा तेरा ईश्वर |
तू जान उसे पहचान जरा, वह बिलकुल तेरे जैसा है,
तुझसा निर्मल तुझसा कोमल और शर्मीला तेरा ईश्वर |
न हाथों में है धनुष लिए, न शंख चक्र, न गदा धरे,
वो तुझे देखकर पुलकित हो मुस्काया है तेरा ईश्वर |
न देखे तेरे दोषों को, न पाप पुण्य को तकता है,
वो तुझको खुद से भी ज्यादा चाहे-सोचे तेरा ईश्वर |
न तो वो घट-घट वासी है, न अक्षय न अविनाशी है,
वह तेरी पूजा बन करके, तुझमे रमता तेरा ईश्वर |
न अवतारी जग का रक्षक, न संघारक है श्रृष्टि का,
वो जन्मा है बस तेरे लिए, तुझपे मरता तेरा ईश्वर |
न निराकार, न परमब्रह्म, न तेरे मन का उजियारा,
अंधियारों में वो दीप जला, संग-संग चलता तेरा ईश्वर |
न उसको पाने की खातिर, तुझको करना कोई जप-तप,
वो मन में तेरा प्यार भरे, सम्मुख बैठा तेरा ईश्वर |
न प्रतिमा है, न ज्योति है, तेरी पूजा तेरा ईश्वर |

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