Friday, September 3, 2010

बेअसर

मैं उसे हर घडी देता हूँ बद्दुआऐं हज़ार,
मुझे पता है बेअसर हैं दुआओं की तरह|

2 comments:

  1. एक आंख से आंसू पोंछ सको
    तो समझो पूरे इन्सां हो
    दुनिया को रुलाने की खातिर
    हेवान हजारो लाखो है !

    ReplyDelete
  2. गुजरे हैं जमाने अश्रुओं की आहुतियाँ देते,
    खुद पे होता हूँ हैराँ अब तक इन्सां कैसे हूँ|
    sorry for late reply!

    ReplyDelete