"हर हंसी में दर्द छिपा है, हर ख़ुशी के पीछे गम हैं
मत सोच हुआ क्यूँ ऐसा, मत सोच के आँखें नम हैं,
शरमा जाएँ आंसू भी, मुस्कान जो तेरी देखे,
गम को भी दिखला दे तू, खुशियों में कितना दम है!
हाथों में रंग उठा ले, और फिजां गुलाबी कर दे,
आ मिल के शोर मचाएं, "होली का ये मौसम है!"
मत सोच हुआ क्यूँ ऐसा, मत सोच के आँखें नम हैं,
शरमा जाएँ आंसू भी, मुस्कान जो तेरी देखे,
गम को भी दिखला दे तू, खुशियों में कितना दम है!
हाथों में रंग उठा ले, और फिजां गुलाबी कर दे,
आ मिल के शोर मचाएं, "होली का ये मौसम है!"
आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा. हिंदी लेखन को बढ़ावा देने के लिए आपका आभार. आपका ब्लॉग दिनोदिन आप अवश्य पधारें, यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आये तो "फालोवर" बनकर हमारा उत्साहवर्धन अवश्य करें. साथ ही अपने अमूल्य सुझावों से हमें अवगत भी कराएँ, ताकि इस मंच को हम नयी दिशा दे सकें. धन्यवाद . आपकी प्रतीक्षा में ....
ReplyDeleteभारतीय ब्लॉग लेखक मंच
danke ki chot par
उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद पिछले कुछ दिनों से ब्लॉग नहीं लिख पा रहा था फिर से शुरुवात कर रहा हूँ आशा है आप लोगों का साथ बना रहेगा।
Delete