लोकतंत्र या भीड़तंत्र
कैसा है भला ये लोकतंत्र,
चिंतन कर, मंथन कर देखो |
इक्यावन का राज यहाँ,
उनचास के हक़ का मर्दन है |
कौटिल्य का भूले अर्थशास्त्र,
बस कूटनीति का अर्चन है|
निर्माण न करती भीड़ कभी,
तुम भीड़ का हिस्सा बन देखो |
कैसा है भला ये लोकतंत्र,
चिंतन कर मंथन कर देखो |
एक राजतंत्र का कर विनाश,
सौ नव-कुलीन का सृजन है |
जन-जन से शक्ति जुटाकर ही,
जन-जन के मान का मर्दन है |
इस मान-हानि की पीड़ा अब,
तुम आम आदमी बन देखो |
कैसा है भला ये लोकतंत्र,
चिंतन कर मंथन कर देखो |
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